कार्बन क्रेडिट योजना क्या है? क्या यह सरकारी योजना है?
बहुत से किसान पूछते हैं कि कार्बन क्रेडिट की सरकारी योजना कौन सी है और रजिस्ट्रेशन कहाँ होगा। सीधा जवाब यह है कि अभी कोई सब्सिडी वाली योजना नहीं है — और यही बात जानना आपको ठगी से बचाती है।
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तुरंत जवाब
क्या कार्बन क्रेडिट कोई सरकारी योजना है?
अभी नहीं। आज किसानों को जो कार्बन क्रेडिट मिलते हैं वे लगभग सब स्वैच्छिक बाज़ार से आते हैं — यानी निजी कंपनियाँ अपनी मर्ज़ी से ख़रीदती हैं।
इसमें कोई सब्सिडी नहीं, कोई सरकारी फ़ॉर्म नहीं, और कोई दफ़्तर नहीं जहाँ जाकर आप नाम लिखा सकें।
सरकार की अपनी व्यवस्था CCTS बन रही है और खेती को उसमें लाने की बात है, पर किसानों के लिए उसके नियम अभी पूरी तरह लागू नहीं हुए हैं।
आज की स्थिति। CCTS बन रहा है, पर किसानों के लिए नियम अभी पूरे नहीं हुए।
यह सवाल इतना क्यों पूछा जाता है
भारत में किसान की आदत — और भरोसा — योजना से जुड़ी है। बीज पर सब्सिडी, सिंचाई पर योजना, फ़सल बीमा योजना। इसलिए जब "कार्बन क्रेडिट" की बात सुनाई देती है, तो सबसे पहला सवाल यही उठता है कि यह कौन सी योजना है और रजिस्ट्रेशन कहाँ होगा।
यह स्वाभाविक सवाल है। और ठीक इसी जगह सबसे ज़्यादा ठगी होती है — क्योंकि "सरकारी योजना" कह देने से बात तुरंत भरोसे की लगने लगती है।
अगर कोई यह कहे, तो रुक जाइए
"यह सरकार की नई योजना है, आपका रजिस्ट्रेशन करा देते हैं, बस इतनी फ़ीस लगेगी।"
ऐसी कोई योजना अभी नहीं है। और असली प्रोजेक्ट किसान से फ़ीस नहीं लेता।
तो फिर यह चलता कैसे है?
बीच में एक कड़ी होती है। समझने के लिए क्रम याद रखिए:
- कोई कंपनी या FPO एक प्रोजेक्ट बनाता है — मान लीजिए एक ज़िले के धान किसानों का।
- वह प्रोजेक्ट Verra या Gold Standard जैसी अंतरराष्ट्रीय रजिस्ट्री में दर्ज होता है। यहीं वह प्रोजेक्ट नंबर बनता है जो आपको माँगना है।
- किसान उस प्रोजेक्ट में शामिल होते हैं — ज़मीन का ब्योरा, खेती का तरीक़ा, और अनुबंध।
- बाहर का निरीक्षक हर साल जाँच करता है कि जो कहा गया वह सच में हुआ।
- जाँच के बाद क्रेडिट बनते हैं और ख़रीदार को बेचे जाते हैं।
- ख़र्च और हिस्सा कटने के बाद किसान तक पैसा पहुँचता है।
ध्यान दीजिए
दर्ज प्रोजेक्ट होता है, किसान नहीं। इसलिए "आपका कार्बन रजिस्ट्रेशन" जैसी कोई चीज़ नहीं होती।
आपको जो करना है वह है — किसी अच्छे प्रोजेक्ट में शामिल होना, और शामिल होने से पहले उसका नंबर जाँच लेना।
CCTS — जो बन रहा है
भारत सरकार की अपनी कार्बन बाज़ार व्यवस्था को CCTS कहते हैं। इसे ऊर्जा दक्षता ब्यूरो चला रहा है। इसमें दो हिस्से हैं — एक बड़े उद्योगों के लिए अनिवार्य, और एक ऑफ़सेट हिस्सा जिसमें खेती जैसे क्षेत्र आ सकते हैं।
अगर यह ठीक से चला, तो इसका एक बड़ा फ़ायदा होगा: ख़रीदार देश के अंदर बनेंगे। आज भाव विदेशी ख़रीदारों पर टिका है।
लेकिन आज की तारीख़ में यह भविष्य की बात है। इस पर आज का पैसा मत गिनिए।
तो किसान के लिए आज क्या रास्ता है?
| रास्ता | आज क्या है | क्या करें |
|---|---|---|
| सरकारी सब्सिडी योजना | अभी नहीं है | ऐसा कहने वाले से सावधान रहें |
| स्वैच्छिक बाज़ार (निजी कंपनी या FPO के साथ) | यही चल रहा है — धान के पानी में सबसे भरोसेमंद | रजिस्ट्री नंबर जाँचकर शामिल हों |
| CCTS (सरकारी व्यवस्था) | बन रहा है, खेती के नियम अभी पूरे नहीं | नज़र रखें, पर आज का पैसा इस पर न गिनें |
दस्तख़त से पहले यही पूछिए
जवाब कागज़ पर लीजिए
- किस रजिस्ट्री में दर्ज है, नंबर क्या है? नंबर नहीं तो सौदा नहीं।
- प्रति एकड़ कितना, और कब मिलेगा?
- हिस्सा किसका कितना?
- निकलना हो तो कैसे निकलूँगा?
- क्या मुझे पहले कुछ देना है? — हाँ, तो वहीं से लौट जाइए।
अगर आप किसी FPO या सहकारी समिति से जुड़े हैं तो आपकी स्थिति बहुत मज़बूत है — समूह कड़े सवाल पूछ सकता है और बेहतर हिस्सा तय करा सकता है।
यह जानना चाहते हैं कि आपकी ज़मीन या आपका समूह इसके लायक़ है या नहीं? मुफ़्त जाँच के लिए कहिए। जवाब "नहीं" होगा तो भी हम वही कहेंगे।
अगस्त 2026 तक की जानकारी। यह सामान्य जानकारी है — कृषि, वित्तीय या कानूनी सलाह नहीं। सरकारी नियम बदलते रहते हैं; कोई भी फ़ैसला लेने से पहले ताज़ा स्थिति जाँच लें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या कार्बन क्रेडिट कोई सरकारी योजना है?
अभी नहीं। आज भारत में किसानों को जो कार्बन क्रेडिट मिलते हैं वे लगभग सब स्वैच्छिक बाज़ार से आते हैं, जहाँ निजी कंपनियाँ अपनी मर्ज़ी से ख़रीदती हैं। इसमें कोई सब्सिडी नहीं है, कोई सरकारी फ़ॉर्म नहीं है, और कोई दफ़्तर नहीं है जहाँ जाकर आप कार्बन क्रेडिट के लिए नाम लिखा सकें। यह किसी कंपनी या किसान समूह के साथ किया गया एक निजी अनुबंध होता है। भारत सरकार की अपनी व्यवस्था CCTS बन ज़रूर रही है, लेकिन किसानों के लिए उसके नियम अभी पूरी तरह लागू नहीं हुए हैं।
कार्बन क्रेडिट के लिए रजिस्ट्रेशन कहाँ होता है?
किसान ख़ुद सीधे कहीं रजिस्ट्रेशन नहीं कराता। जो चीज़ दर्ज होती है वह प्रोजेक्ट होता है, किसान नहीं — और उसे कोई कंपनी, FPO या प्रोजेक्ट डेवलपर Verra या Gold Standard जैसी अंतरराष्ट्रीय रजिस्ट्री में दर्ज कराता है। किसान उस प्रोजेक्ट में शामिल होता है, अपनी ज़मीन और अपनी खेती के तरीक़े की जानकारी देता है, और अनुबंध पर दस्तख़त करता है। इसलिए अगर कोई कहे कि फ़ीस देकर आपका कार्बन क्रेडिट रजिस्ट्रेशन करा देंगे, तो समझ जाइए कि बात ग़लत है।
CCTS क्या है और किसान पर इसका क्या असर होगा?
CCTS यानी कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम भारत सरकार की अपनी कार्बन बाज़ार व्यवस्था है, जिसे ऊर्जा दक्षता ब्यूरो चला रहा है। इसमें दो हिस्से हैं — एक बड़े उद्योगों के लिए अनिवार्य हिस्सा, और एक ऑफ़सेट हिस्सा जिसमें खेती जैसे क्षेत्र आ सकते हैं। खेती को शामिल करने की बात है और तरीक़े धीरे-धीरे अधिसूचित हो रहे हैं। अगर यह ठीक से लागू होता है तो देश के अंदर ही ख़रीदार बनेंगे और भाव बेहतर हो सकते हैं, पर आज की तारीख़ में किसान इस पर पैसा नहीं गिन सकता।
अगर सरकारी योजना नहीं है तो पैसा कौन देता है?
पैसा वे कंपनियाँ देती हैं जिन्हें अपना कार्बन उत्सर्जन घटाना है — अक्सर बड़ी विदेशी कंपनियाँ, कभी-कभी भारतीय कंपनियाँ। वे सीधे किसान को पैसा नहीं देतीं। बीच में एक प्रोजेक्ट डेवलपर या FPO होता है जो किसानों को जोड़ता है, खेती के तरीक़े का हिसाब रखता है, बाहर के निरीक्षक से जाँच कराता है, क्रेडिट बनवाता है और बेचता है। उसके ख़र्च और हिस्से के बाद जो बचता है वह किसान तक आता है। इसीलिए यह पूछना ज़रूरी है कि हिस्सा किसका कितना है।
किन दावों से सावधान रहना चाहिए?
इन तीन बातों से तुरंत सतर्क हो जाइए। पहला, कोई कहे कि यह सरकारी योजना है और आपका नाम लिखवा देंगे — अभी ऐसी कोई योजना नहीं है। दूसरा, कोई रजिस्ट्रेशन या फ़ॉर्म के नाम पर पैसा माँगे — असली प्रोजेक्ट आपको पैसा देता है, आपसे लेता नहीं। तीसरा, कोई प्रति हेक्टेयर 12, 15 या 20 क्रेडिट का वादा करे — आज के मान्य तरीक़ों से धान में लगभग 4 से 6 क्रेडिट प्रति हेक्टेयर प्रति मौसम बनते हैं, इससे ज़्यादा बताने वाला या तो रद्द हो चुका तरीक़ा इस्तेमाल कर रहा है या आँकड़े ख़ुद बना रहा है।
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Devendra Kumar Jha
LinkedIn ↗देवेंद्र, Agpro Consulting Private Limited के निदेशक हैं और AgriCarbon Credits का नेतृत्व करते हैं — जो इसकी सहयोगी संस्था और carboncreditconsulting.in की कृषि शाखा है। वे भारतीय किसानों, FPO, सहकारी समितियों और कृषि व्यवसायों को कार्बन प्रोजेक्ट परखने, बनाने और उनसे कमाई करने में मदद करते हैं।
- कृषि कार्बन प्रोजेक्ट डिज़ाइन और सलाह
- FPO, सहकारी समिति और कृषि व्यवसाय कार्यक्रम
- मिट्टी कार्बन, कृषि वानिकी और धान मीथेन

